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जब तू था

जब तू था
जब तू पास था तो दुनिया हसीं न ख़्वाब सी लगती थी
जैसे हर ज़र्रा हर शख़्स हर नज़ारा बस मेरे लिए ही बना हो

मैं जो भूल गई थी जीने का सलीका
तेरी रहगुज़र में फिर से जीने लगी थी

हाँ पल हर लम्हे को संभालने लगी थी
हँसने, मुस्कुराने लगी थी

मेरी सारी दुनिया तेरे आस पास हो गई थी
हर चीज़ जो अब इतनी हसीन लग रही थी

वो हर चीज़ पहले भी थी पर उनपर कभी ध्यान नहीं दिया था मैंने
पर तेरे साथ होकर मैं सबकी होने लगी थी

पर अब जब तू चला गया है दूर
बिना बोले बिना कुछ कहे
मेरी झोली में अनंत काल तक का इंतज़ार देकर
मेरी आँखों में समंदर भर कर

अब सब कुछ फिर से धुंधला सा लगने लगा है
हर शख़्स अब पराया और हर लम्हा बेगाना सा लगने लगा है

अब हर जगह हर किसी में तेरा चेहरा ढूँढने लगी हूँ
तेरी आवाज़ हर किसी से मिलाने लगी हूँ

अब ज़िंदगी भी बेगानी सी लगती है
खुशियाँ भी दरवाज़े पर खड़ी रोती रहती हैं

क्या करूँ, कैसे करूँ सब समझ से बाहर लगता है
अब ये जीवन मुझे बोझिल सा लगता है

Ink&Emotions
#Love#Pain#longing#sad#loneliness