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जी चाहता है✍️

कभी रोकने का सोचा नहीं उन्हें
मगर रोकने को जी चाहता है
ज़हर जो है उनके पास, उसे
पीने को जी चाहता है
खुद ही किये हैं गुनाह भरपूर
शर्मिंदा होने को जी चाहता है
उड़ने दिया था उसे खूब
अब संग रहने को जी चाहता है
लौट आ तू तेरी ज़रूरत है
ऐसा कहने को जी चाहता है
पुकारें भी उन्हें किस हक़ से??
कोई ऐसा हक़ पाने को जी चाहता है
©deeprichu