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जी रहा हूँ मैं...

जी रहा हूँ मैं, हां,जी रहा हूँ मैं,
ग़म हज़ारों है अगर, सैकड़ों खुशियां भी हैं,
आंसू हैं जो बाहर निकलते नही, मुस्कान है चेहरे पर मेरे,बस ऐसे ही जी रहा हूँ मैं।
मोहब्बत को खोया है, ये दिल मेरा रोया है, इतना कि झलकता नहीं अब,
साथी या हमसफर कोई नही, बस जी रहा हूँ मैं,बस जी रहा हूँ मैं।
कह रहा हूँ दुनिया से की रब की मर्ज़ी है,
रब से ये शिकायत की दुनिया ये फ़र्ज़ी है,
क्या चाहता हूं ये जानता नही, बस कुछ मांग रहा हु मैं,
पर जीना चाहता हु, सो जी रहा हूँ मैं।
जिंदादिली का नाम है जिंदगी, एक सुबह, एक शाम है जिंदगी,
एक सफर भी है, आराम भी है ज़िन्दगी,
मोहब्बत हो गयी है तुझसे ऐ ज़िन्दगी,
मोहब्बत हो गयी है तुझसे ऐ ज़िन्दगी,
इसलिए बस जी रहा हूँ मैं।~raaj
©raajwrites