जिद है मंजिल को पाने की,
अब जरुरत नाही है किसी चाहने वाले की,
सफर मेरे अकेले का है,
अब जरुरत नहीं है किसी हमसफर की,
अब उडना है उचे आसमान में,
पुरे जहान कि खुशिया रखनी है माँ के कदमो में,
छुटी थी जो कहानी अधुरी मेरे सपनो की,
अब जिद है उसे पुरी करने की,
जिद है मंजिल को पाने की.
©mahipatil
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