कश्तियों की तलाश में निकला था
दुआओं के काबिल हो गया
बाहर की तलाश में निकला था
भीतर का आदि हो गया
मुस्कुराहट ढूंढने निकला था
दूसरों की मुस्कुराहट में ही खो गया
मंजिल पाने निकला था
राहों की खूबसूरती में ही सो गया
अच्छाई की खोज में निकला था
भीतर से सुंदर हो गया
ईश्वर का भरोसा जीतने निकला था
लोगों के भरोसे के काबिल हो गया
शब्दों को लिखने निकला था
आज अपने ही शब्दों में विभोर हो गया
नेकी करने निकला था
जमीर से मिलने की खुशी में थोड़ा रो गया
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