जीवन में आते है अनेक सपने,
उनमें थोड़ेसे लगते है अपने ।
उन सपनों में हम बह जाते,
उनमें अपना जीवन भरते ।
ऐसे सपने लगते अपने ।।1
जीवन को वे फूल बनाते,
उसको अपनी छाया देते ।
अनगिनत उनकीं हैं गिनती,
जैसे आसमान में तारे हैं ।
ऐसे सपने लगते अपने ।।2
जैसे भविष्य आता हैं,
वे प्रवाह बनकर जाते हैं ।
जीवन के एक नए मोडपर,
वे दिशा भटकाकर जाते हैं ।
ऐसे सपने लगते अपने ।।3
जब सपने बिछड़कर जाते हैं,
तब हम भी खोकर जाते हैं।
जीवन के इस नए मोड पर,
हम नासमझ बन जाते हैं ।
ऐसे सपने कभी न हो अपने ।।4
उन सपनों में कभी मत बहना,
उनमें खुद को व्यर्थ न करना।
अच्छाई को अपना कहना,
यही है अच्छे जीवन का सपना ।
ऐसा ही ••••हो अपना सपना।।5
_अथर्वा धुमे (✍)
©antarang
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