जीवन का ‘जी’
भटक रहा वन में
मचल मचल जाये
लगे आग जीवन में
जीवन में जन जन
लोजी करे परेशान
करके राम राम
निकाले अपना काम
सो अपना काम है सोना
सोने के ऊपर रोना
दे दो भैय्या आज
एक तकिया व बिछोना
ताकि करे चैन जीवन
मिले परम सुख
जीवन में जी हमारा
पा रहा है जी दुःख
अब आँखों में होंगे सपने
सपनों में होगी परी
असल जिंदगी में तो जी
सुन्दर बीवी भी लगे बकरी
बकरी बन कर चर गई
मुश्किलें जीवन हमारा
उजाड़ा उसी ने जीवन
जिससे मांगने चले थे सहारा
सहारे अब हमारे
कॉपी और किताब
पाई पाई का रखे हैं
हर सुख दुःख का हिसाब
हिसाब करेंगे सबका
पर जी आज सोने दो
भर गया जी सुख दुःख से
थोड़ा थोड़ा खोने दो
खोकर खो ना पाये
नाम उसका जिंदगानी
कभी लबों पे हंसी
कभी आँखों में पानी
बस चलती जा रही
हाँ जी चलती जा रही
अब सोने दो
जी सोने दो।
🌹🌹🌹
©vikasgarg
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