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" जीवन सागर "

जीवन की ओट में ,
बाधाओं की चोट में ,
सफलता की खोज में ,
जब हम असहाय हो जाते हैं
तो खुद से चुने विकल्पों में ही खो जाते हैं
पर वास्तव में हम ईश्वर के निकट और साक्षात हो जाते हैं धीरे-धीरे खुद को संभालने के काबिल हो जाते हैं
और दूसरों की निष्क्रियता से वाकिफ हो जाते हैं
ईश्वर की अनुभूतियों में मोहित हो जाते हैं
और भीतर की निष्ठता में शोभित हो जाते हैं
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