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" जीवनधारा "

जीवन एक धारा है
जिसमें व्यक्तित्व एक तारा है
जिसे रोशन करना कर्तव्य हमारा है
इससे ही हमारे भीतर में उजियारा है
जिसने खुद को हर सांचे में उतारा है
उसने हर परिस्थितियों से खुद को उबारा है
हमारा भीतर ही मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारा है
जिसने हर पल को अच्छाई से संवारा है
उसे ही ईश्वर का सहारा है
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