धरती पर परमात्मा स्वरूप माँ -बाप प्यारे मिले,
दोस्तों से मिलकर,
पतझड़ में भी सुगन्धित फूल खिले,
पर देखकर अपनों को,
कभी ना दिल की कली खिली,
करते ही रहे हम ताउम्र अपनों से शिकवे-गिले,
बाकी जो बचा वो...
माँ कुदरत ने डाल दिया झोली में,
पर सब कुछ होकर भी, बिन बात उदास है हम
कुछ भी नही, सिर्फ एक जिंदा लाश है हम
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©vikasgarg
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