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जिंदगी

हैं कितने गम के पन्ने इस किताब-ए-जिंदगी में
जानना है जानना है जानकर रहेंगें
सह लिए हैं दर्द जितने सहने थे तुम्हें
अब दर्द तुम्हारे बांटना है बांटना है बांटकर रहेंगे
©mittawrite