जिन्दगी की रफ़्तार जाने क्यों इतनी तेज़ है
कल तलक तो खुशियां मेरे घर के आंगन में कदम रखीं थीं
आज जाने कहां गुम हो गईं,
उनको ढूंढने की आस में मैंने आज की खुशियों को खो दिया
जिन्दगी की रफ़्तार जाने क्यों इतनी तेज़ है
अपनों से गिले सिक्वे के चलते मैंने बात नहीं की उनसे
और जब बात करनी चाही तो जिन्दगी न जाने किस मोड़ पर थी जहां सब बहुत दूर थे और सारी जिन्दगी इसी में बीत गई
जिन्दगी की रफ़्तार जाने क्यों इतनी तेज़ है
©sharda
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