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!! ज़िन्दगी !!

दौड़ने की बात तो दूर अभी तो चलने भी नहीं दिया
फ़िर न जाने क्यूँ अभी से इतना थकाए जा रही है,
फुर्सत में कभी बताया ही नहीं कि क्या गुनाह है मेरा
बिन बताए ही मुझ पर इतने जुल्म बरसाए जा रही है,
रखना चाहती है वो मुझे सबसे दूर बस एक तन्हाई में
फ़िर न जाने क्यूँ दिल के इतने हिस्से बनाए जा रही है,
मानो जैसे गुज़ारनी हैं मुझे इस क़ायनात में सदियां
जो हर एक क़दम पर इतने तजुर्बे सिखाए जा रही है,
लाकर मुझे खड़ा किया एक अनजाने से मोड़ पर
न जाने क्यूँ अब यूँ सबसे रूबरू कराए जा रही है,
खुल कर हंसना शब्द तो रखा ही नहीं मेरे शब्दकोश में
एक मुस्कुराहट के पीछे से हर बार ही रुलाए जा रही है,
मंज़िल भी हुई है रुसवा इरादे भी साथ छोड़ रहे हैं
पर फ़िर भी अभी जीने की आरजू दिलाए जा रही है.।।
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©vikasgarg