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ज़िन्दगी

गम को गीतों में ढालते रहिये
ज़िन्दगी यूं ही गुज़ारते रहिये
हर खुशी मिल जाए ये मुमकिन तो नहीं
हर एक गम को अश्कों में ढालते रहिये
ढल गई रात तो ढल जाएगा अंधेरा भी
इन्तज़ार में सुबह के रात काटते रहिये
जो टूट जाओगे तो ये दिल भी टूट जाएगा
हर इक पल उम्मीद की लौ जलाते रहिये
जलेंगे दीप हजारों तुम्हारी राहों में
के डगमगाने से कदमों को बचाते रहिये
©maahisingh