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जिंदगी है तो ये दुनियादारी है ।

जिंदगी है तो ये दुनियादारी है
मगर वक्त हर रिश्तों पर भारी है।
आए हैं तो चले जाना भी है एक दिन
आज आपकी तो कल मेरी बारी है।
मैं खुद टुट गया जोड़ते जोड़ते रिश्ते
अब नहीं किसी में जज्बाती समझदारी है।
अफसोस जिस्म भी तब्दील होगा खाक में
जिसके लिए ये उम्र भर की तैयारी है।
आखिर हम अनुराग एक दुसरे से खफा क्यूँ है
दोनों दिलो को जब अजब बेकरारी है।
©anuragrahi