जिंदगी हम जिएं पर जिंदगी रह गई
जिंदगी में किसी की कमी रह गई।
हम कई बार निकले और आ गए लौटकर
वो गई फिर गई की गई रह गई।
अश्कों पे चढ़ाया है अपने गर्द-ए-परत
मगर यादों की दिल में एक नमी रह गई।
भुलने में तुम्हें अब जमाने लगेंगे
वहीं की वहीं धड़कने अब थमी रह गई।
कोई देता नहीं साथ अंतिम सफ़र तक
रहबर ग़म ही हमसफ़र अब बनी रह गई।
अनुराग कैसे करें तेरे वफाओं का ब्यां
होंठों पर मेरे जब एक चुप्पी रह गई।
©anuragrahi
S