जिन्दगी और कुछ नहीं एक मुसाफिरखाना हैं
हर नई कोशिश से पहले जहाँ पडता टिकट कटाना हैं
जिन्दगी और कुछ नहीं एक मुसाफिरखाना हैं
इस जिन्दगी रूपी मुसाफिरखाने में हमारे सपनों तक ले जाने वाली आती है कई रेल
हमें इनके पीछे भागना पडता है ऐसे जैसे लाल कपडे के पीछे भागती है बेल
ये रेल कुछ ओर नहीं सपनों को पाने का एक मात्र बाहाना हैं
जिन्दगी और कुछ नहीं एक मुसाफिरखाना हैं
ओर भी लोग है कहीं जिनकी भी चाहत उस मंजिल तक जाना हैं
इतने लोगो की भीड़ में काहाँ आसान उस मंजिल को पाना हैं
पर जिसने समय का मोल समज लिया तो ' मुश्कील रेल का उसे छोड़ जाना हैं
जिन्दगी और कुछ नहीं एक मुसाफिरखाना हैं
जब हम सभी मुश्किलो को पार कर सपनों तक पहुँचाने वाली रेल मैं बेठ जाते हैं
जैसे देल्ही. कोटा और न जाने कितनी हि जगह अपने सपनों को पुरा करने बच्चे आते हैं
मेहनत ओर जुनुन से भरे इस सफर मे मुश्किल बडा टीक पाना हैं
जिन्दगी और कुछ नहीं एक मुसाफिरखाना हैं
हार जाते हैं कहीं बीच सफर मे हिं उन्हे लगता नामुमकिन उनके लिए ये सपना सुहाना हैं
इस सफर को पुरा करने से आसान लगता उनको चलती रेल से कूद जाना हैं
उस मेहनत से बचने के लिए भुल जाता वो अपनी मंजिल का फसाना हैं
जिन्दगी और कुछ नहीं एक मुसाफिरखाना हैं
जो बिना हारे उस चुनौतियों भरे सफर को तय करता हैं
भगवान भी उसके रास्ते में आने वाली हर बाधाओं को हरता हैं
फिर कहाँ उसके लिए मुश्कील उस सपनें को पाना हैं
जिन्दगी और कुछ नहीं एक मुसाफिरखाना हैं
जिन्दगी और कुछ नहीं एक मुसाफिरखाना हैं
-Vinita
©gopalshyam
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