गुजारिश तो की थी ताउम्र साथ रहने की |
ख्वाहिश तो थी हर जन्म तुम्हारे होने की |
पर तकदीर को भला यह मंजूर कहां |
इस जमाने को भला कुबूल कहां |
क्या फर्क पड़ता तुम मेरे साथ ना हो ,
तुम्हारे होने का एहसास तो है |
क्या फर्क पड़ता तुम मेरे ना हो सके ,
मैं तो तुम्हारा हमेशा से ही था |
क्या फर्क पड़ता तुम कभी मिलो भी नहीं ,
तुम्हारी तस्वीर तो मैंने अपने दिल में उतार रखें है |
क्या फर्क पड़ता तुम मेरी जिंदगी ना बन सके ,
पर मेरी धड़कनों की रफ्तार तुम ही तुम हो |
जिधर देखता हूं तुम्हें ही पाता हूं ,
हर वक्त हर लम्हा |
तुम ना सही तुम्हारी एहसास ही सही |
मुलाकात ना सही तुम्हारी ख्वाब ही सही,
काफी है काफी है,
इतना ही बस काफी है |
©addy
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