जिंदगी खुबसूरत है वक़्त ज़ाया न करों
हो सके उतना खुद से खुश रहा करों।
जीने का अपने अंदर हौसला अफजाया करों
फकत ऊंचे-ऊंचे ख़्वाब न देखा करो।
सुख तो बेवफा है इक माशुका की तरह
दुख से ही दोस्ती का हाथ बढ़ाया करों।
शख्त इरादों वालें मौत का फ़िक्र नहीं करते
ज़ेहन में हादसों का खौंफ लेकर न निकला करों।
कुछ तो अजब हों रहा है इस दुनियां में
तुम भी कयामत न अब बरपाया करों।
मशविरा दे रहे हैं दोस्त मुझको आज़ कल
बेंच दो अनुराग अच्छाईयां ईमान का सौदा करों।
©anuragrahi
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