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जिंदगी तेरी चर्चा

जिंदगी तेरी चर्चा है चहुंओर
लिपटाकर तुझे अँधेरे में
ढूंढ रहे देखो भोर
अब मुर्गा ना बांग देता
व्हाट्सप्प के मैसेज जगाये
जगाये तो आँखे खोल
टीवी पर जी आँख टिकाये
फिर देर सुबह करके जलपान
खोले जीने की दूकान
ढूंढे खुशियां चहुंओर
बिना देखे आनंद की भोर
बिना सुने पक्षी का शोर
ना बारिश में भीगे घनघोर
पर ढूंढें देखो मजा
जीवन को बनाके सजा
किये जा रहे बस खर्चा
खर्च हो रहा ऐसे जीवन
अब क्या करें जीवन की चर्चा
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©vikasgarg