जिस्म ओ जां यहाँ सबका कुदरत ने बनाया है
इंशां ने फकत इसका यहाँ तिजारत कराया है।
उठा लेते है इंशां इंशां के गर्दन पर अक्सर शमशीर
कर के हलाक इन्सानियत का गर्व से और सर उठाया है।
इशारों ही इशारों में शिकायत है जो वो कर दो
वगरना जालिमों ने यहाँ खुफिया कैमरा लगाया है।
हमारे इश्क़ के चर्चें हर मोहल्ले हर गली में है मगर
सौदागर मौत के बने है वो जिन्हें कभी तुने ठुकराया है।
वो आंखें तो कभी अहिंसात्मक है हो ही नहीं सकता
जिसको मुद्दतों से जमाने ने खूं के आंसू रूलाया है।
किसी के वास्ते जिना किसी के वास्ते मर जाना
दुनिया है उसका कायल शायर अनुराग ने फ़रमाया है।
©anuragrahi
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