S

जख्म जिस्म पर है इलाज दिल का करना पड़ता है।

जख्म जिस्म पर हैं इलाज दिल का कराना पड़ता है
न चाहते हुए भी हर वक्त मुस्कुराना पड़ता है।
हमने तो अभी तक जिंदगी में हासिल कुछ नहीं किया
महफिल-ए-कामयाबी में शर्माना पड़ता है।
अब तक एक ही हुनर हमनें सिखा है कि वो
अपनी जां देकर भी किसी की आबरू बचाना पड़ता है।
मेरे तक्कलुफ जज्बातों को जब लोग समझ नहीं पाते
शेरों के सहारे सबको बताना पड़ता है।
मैने न कभी चोट पहुंचाई न कभी बदनाम किया
फिर क्यूं मुझे देखकर उन्हें मुंह छुपाना पड़ता है।
मर्ज-ए-इश्क़ तेरा हो चुका लाइलाज अनुराग
ऐसे में दिल पर हर वक्त ग़म का मरहम चढाना पड़ता है।
©anuragrahi