हमारी ही लगती जा रही है हमारे जल संसाधनों को नजर
दिन व दिन नीचे होता जा रहा है पानी का स्तर
कहां तो पैर जमीन पर मारने से ही फुट पड़ती थी जल धारा
कहां कई कई सौ फुट पर भी नही मिलता, पानी बेचारा
ताजे पानी की बुंद बुंद को तरसोगे, यही मनुष्य जीवन का आखिरी हल है
जल है तो कल है
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©vikasgarg
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