सोचते रहें हालातों को
क्या जुर्म हमसे हुआ है,
कहते सुना किसी और से
की दर्द हमसे बड़ा सहा है,
कोई सुनाइए जाकर
उन्हें कहानी मेरे दर्द की,
शायद उनकी हँसी देखकर
हम भी अपना दर्द भुला दे।
- निलेश इंगोले
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