इ जालिम जमाना काहे मारऽ तारे ताना-२
इहां कोई नइखे केकरो-२ सब खुद से बा बेगाना
इ जालिम जमाना काहे मारऽ तारे ताना ।-२
अरे इहां हर एक हीर बाटे हर एक मजनूँ
रोगी प्रेम के कम नइखे जैसे प्रेमरोगी सानतनूं
अपना हिसाब से बा-२ सभी के प्रेम के अफसाना
इ जालिम...................................... ताना ।
कभी सोहरे भुइंया त कभी ढोंड़ीकट बा
का करी इहो अब फैशन चलन फटाफट बा
केके कहि बुढवन अब-२ इहां सब बाटे दिवाना
इ जालिम...................................... ताना ।
अरे होटल पारक भरल बाटे प्रेम के श्रृंगार से
बबुनी के बा घर भरल हर नया नया उपहार से
हो देखीं अनुराग कहें-२ अब इहे बा जमाना
इ जालिम जमाना काहे मारऽ तारे ताना
इहां कोई नइखे केकरो सब खुद से बा बेगाना
इ जालिम जमाना काहे मारऽ तारे ताना ।
©anuragrahi
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