जंग तो आखिर जंग है, चाहे वो सरहद पर खड़े दुश्मन से हो या फिर अंदर के गद्दारों से।
मुश्किल नहीं है कुछ भी,
अगर मुक्ति मिल जाए इन मक्कारो से,
अपना तो एक ही फंडा है,
जो बोलो मुंह पे बोलो,
बाकी मुंह छिपाने वाले आज चुप बैठे है,
कितना गिरोगे यार नजरों से,
थोड़ी तो शर्म करो,
और दूसरे का हक मारकर अगर तुम्हे कुछ मिलता है,
तो इसी तरह अपना वर्चस्व भरो।
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