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जन्नत

ये खबर पहुंचा दो कोई उन तक
कि कोई लापता हो गया इक शहर में
जिसकी गालियां जन्नत को खुलती हैं
खबर पहुंचा दो उन तक
कि कोई ढूंढे नहीं मिल रहा
गुमनाम हो गया शायद
कोई ज़रा खींच कर उनका ध्यान
लगवा दो उनकी गलियों पर
बता दो कोई उन्हें
कि जन्नत ऐसी भी गलियों में बसता है
©yash.more