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ज्ञान

सोमवार के दिन ज्ञान की क्लास थी,
सारी की सारी क्लास उदास थी,
शिक्षक बोले, आज कुछ तूफानी करते हैं,
थोड़ी ही सही, पर शैतानी करते हैं,
आओ, तुमको सुनाता हूँ एक कहानी,
जाओ शंकर, लेकर आओ पानी,
हरिश लाओ थोड़े बड़े पत्थर,
गोपाल लाओ तुम एक कांच का बीकर,
जैक्सन तुम लाओ रेत पतली,
शीला तुम भी ले आना बारिक कंकड़ी,

प्रौफैसर ने टेबल पर रखा बीकर,
ऊपर तक डाल दिये बड़े पत्थर,
प्रौफैसर बोले, क्या ओर डालू पत्थर,
बच्चे बोले, ओर डालोगे पत्थर तो टूट जाएगा बीकर,
प्रौफैसर ने बीकर को थोड़ा हिलाया,
बारिक कंकड़ों को बीच में सटाया,
बच्चे बोले, अब तो बीकर में जगह नहीं,
प्रौफैसर ने बीकर को थोड़ा हिलाया,
उस बीकर में रेत को बिठाया,
बच्चे बोले, अब इसमें कुछ नहीं डाला जा सकता,
ये तो ऊपर तक भर गया रफ़्ता रफ़्ता,
प्रौफैसर ने पानी का जार उठाया,
सारा पानी बीकर में उलटाया,
प्रौफैसर बोले, हमारा दिमाग भी है एक बीकर,
असिमित जगह इसके भीतर,
थोड़े ज्ञान से लगता, मस्तिष्क गया भर,
हर वक़्त डाल सकते हैं इसमें ज्ञान के जर,
हर जगह से कुछ ना कुछ सिखते रहो,
अपने ज्ञान को हमेशा बढ़ाते रहो।
विकास गर्ग
©vicky