V

ज्ञान कर्म सन्यास योग

गीता का है परम् ज्ञान कल्याणी,
बोले अर्जुन से कृष्ण मधुर वाणी,
सबसे पहले दिनकर ने इसको पाया,
मैंने ही उसको गीता ज्ञान सुनाया,
कमलनयन की बात सुन अर्जुन चकराया,
ये मोह ग्रस्त अर्जुन की समझ ना आया,
अर्जुन बोले, दिनकर है बहुत पुराना , तुम अब आये,
फिर ये मधुर वचन थे उसको कैसे सुनाए,
भगवान बोले, भेद ये ना समझो मैं हूँ अज्ञानी,
बोले अर्जुन से कृष्ण मधुर वाणी,
यज्ञों से ज्ञान का अमृत जो पाता है,
वो योगी परमधाम मेरे आता है,
युद्ध ना करेगा तो अर्जुन तू पापी कहलायेगा,
अज्ञान सरिता में ज्ञान रुप नौका से तर जाएगा,
अंधकार से जन्मे हर इक संशय को,
ज्ञान रुप तलवार से खंडित कर दो,
उठो न्याय के लिए लड़ो हे ज्ञानी,
बोले अर्जुन से कृष्ण मधुर वाणी,
विकास गर्ग
©vicky