जमाने का फितरत यही है सदा,
जो है अपना नहीं वो ठहरता कहा है
जो गया छोड़ तुमको,बुरे हाल में वो,
फिर यादों में उसके ,तड़पती कहां हो।
जो जीना अकेले है,मरना अकेले
बस तुम्हीं हो तुम्हारा, नहीं गैर कोई
फिर अकेले में दिन रात दर्पण किनारे
ख्यालों में उसके, बिलखती कहां हो।
आदर्शों को दिल में वह हरदम बिठाके,
जिस सीता ने दुनिया को जीना सिखाया
उसी देव कन्या पर ,जालीम जहां ने
जाने ना क्या क्या लांछन लगाया।
तुम सीता नहीं बस हो आम नारी
निकला ना करो घर से यूं रात सारी
पुछेगा जमाना हर वक्त तुमसे
यूं हीं रात भर तुम, भटकती कहां हो।
@Er Ramjeet Sharma
©rj_writes
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