जो कहते हैं, "तुमने अभी देखा ही क्या है",
उनको कैसे बताऊँ, मैंने क्या-क्या देखा है...
इस छोटे से जीवन में मौत को महसूस किया है,
जीते जी खुद को हर रोज़ मरते देखा है।
अपनी आँखों से अपनी चिता जलते देखी है,
अपने अरमानों का गला घुटते देखा है।
मैंने अपने दिल को टुकड़े-टुकड़े बिखरता देखा है,
मेरे हृदय पर गहरे नासूर पलते देखे हैं।
खुद को हर रोज़ बिखरते देखा है,
अपनों को धीरे-धीरे दूर होते देखा है।
सपनों को चकनाचूर होते देखा है,
किस्मत को मुझ पर हँसते देखा है।
मेरे दिल की बदहाली को देखा है,
तन्हा रातों में खुद से की बातों को देखा हैं।
समेट रही हूँ जर्रा जर्रा अपना,
ज़िंदा हूँ अभी… सिर्फ इतना ही देखा है।
Ink&Emotions
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