B

जो सपने.. ✍

जो सपने कभी टुट गयें थे
उन्हें फिर से बुनने लगीं हूँ,
जिस जिंदगी से कभी खफा
हो गयीं थीं, उस के साथ
चलने लगीं हूँ,
जिस मुस्कान को किसी
कोने में छिपा दिया था
उसे आज फिर से खोजने
लगीं हूँ,
कोई धुन था जिसे मैंने
खो दिया था, आज फिर से
उसी धुन को गुनगुना ने
लगीं हूँ,
जो सपने कभी टुट गयें थे
उन्हें फिर से बुनने लगीं हूँ॥
©banirai