गर वो चाहते तो दे भी देते साथ
उन्हें दुनिया के खौफ ने झुका दिया
मोम सा था यह दिल मेरा
जिसे उन्होंने पत्थर का बना दिया
अब चाह कर भी कोई दस्तक न दे
हमने खुद को ऐसा है बना दिया
हर एहसास था जो भी इस दिल में
उसे कहीं दूर दफना दिया
कोई कशिश, आरजू, तमन्ना नहीं अब
ऐसे तन्हाईओं को पनाह दिया
जला कर उसके आखरी ख़तों को
लफ्जों को कदमों से लिपटा दिया..
©deeprichu
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