हम देखेंगे हम देखेंगे और
परिहार हजार बनके लौटेंगे,
कितनो को तुम यूं हटावोंगे
हम देखेंगे हम देखेंगे ।
अनैतिकता आज फैली है इधर उधर
सरफरोशी दिल मे लेके,
जुल्म के वो तख्त मिटाने इक दिन
हम आयेंगे हम आयेंगे।
पगडा आज तुम्हारा भारी है तो क्या
लहुं में फौलाद लेके,
रियासत की धुन्द से दो हात करने
हम लौटेंगे हम लौटेंगे।
©somgee
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