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just random thoughts...nothing more.

आजकल ख्वाबों पे भी लग रहें हैं ढेरों पहरें
हर इक चेहरों के सामने आ रहें हैं कई चेहरे
खामोश सवालों के राज लगते हैं कितने गहरे
कहाँ जाएँ और किस से शिकायत करें चारों तरफ तो सब हैं बहरे
सभी को तो बस अपनी अपनी है पड़ी
किसी के हाथ है घड़ी तो किसी के लगी है हथकड़ी
कोई वक्त बदलना चाहता है तो कोई रास्ता
अब कहा रह गया "गौरव" किसी का किसी से वास्ता
कभी कभी सोचता हूँ कि क्या है मेरी मंजिल
आज जो बीत गया ,कल तक लग रहा था मुश्किल
ये सफर ,ये दुनिया और ये तमाशे
सब कुछ ही बुना है शब्दों के जाल ने
चाँद को भी तो कल रात ही छुआ है ,गौरव
सनकी हौसलो की उड़ान ने ............
©gauravrao