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जुस्तजू खुदा की।

ये खुदा तेरा आंगन आज चकाचौंध क्यों हैं
फिर कोई चमकदार तारा सजाया है क्या?
ये खुदा तुमने अपनी विरासत बढ़ाई ही क्यों हैं
मेरा घर तेरे न्याय के मुस्तकबिल से बाहर है क्या?
ये खुदा तेरे मिजाज में इतना तकब्बुर क्यों है
फिर किसी मासुम ने तुम्हें ललकारा हैं क्या?
ये खुदा तेरे दरबार में आज गर्दी बहुत क्यों है
फिर कोई गलती दुहराया है क्या?
ये खुदा मुझपर तासीर-ए-ताबिश गहरा क्यों है
औरों के यहाँ बहु बेटियां बेटे बिबियां नहीं मरते क्या?
©anuragrahi