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जय श्री राम

अयोध्या में राम मंदिर,
राम राज्य की अमिट निशानी,
सप्त गंगा सरयू नदी,
घाट का बहता अमृत पानी ।
यह कहानी है,
अनुज भरत के सागर जैसे अपार प्रेम की,
लखन की उर्मिला के अश्कों से सूखे नैन की,
लंकेश रावण पंडित की शिव भक्ति की, पवनसुत हनुमान के राम नाम शक्ति की ।
मर्यादा पुरुषोत्तम, भक्त वत्सल,
कहानी कृपा निधान की।
जिस राम दल में शामिल हम,
बड़ी करुणा श्री राम की।
राम के जो ईश्वर वहीं तो रामेश्वर है ।
राम जिसके ईश्वर वहीं तो महेश्वर है ।
रामलला विराजत जिस अवध में,
अयोध्या धन्य भई।
निज नैनो से प्रभु के दर्शन हो,
जिवनी धन्य भई।
जय राम, जय राम,
राम राम जय राम ।।

© Amarjeet
©amarjeet S