ज्यादा कमाने की अंधी हवस में यारों
खुद की कीमती सांसे ही हम पर भारी हो गयी
हर एक साँस को जन्म देने वाली देवी
इज्जत को मोहताज बेचारी नारी हो गयी
इश्क करना इश्क फैलाना आदत है मेरी
क्यूँ तुझको "विकास" ये अजब बीमारी हो गयी
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©vikasgarg
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