कागज की कश्ती पर होकर सवार
उम्मींदो का दामन लेकर साथ
निकल पडे दुनिया के उसपार।
दुनिया के रंग बडे निराले,
कुछ अपने, कुछ पराये,
कुछ धुदंले, कुछ चमकीले,
रंग रंग का साथ निभाये।
कोई अपना अपनासा लगने लगे,
कोई अनजाना पराया समझने लगे,
फिर भी हर कोई यहा,
अपने ही अंदाज में चलने लगे।
किसी बेखौफ़, बेपरवाह राह में।
किसी की नजर अलग,
किसी का नजरिया अलग,
किसी का अंदाज अलग
तो किसी का मिजाज अलग
फिरभी हर कोई यहा
अपने में ही मस्त रहने लगे।
कागज की कश्ती पर होकर सवार
उम्मींदो का दामन लेकर साथ
निकल पडे दुनिया के उसपार।
©poojathole
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