काल गति जो लड़े वह मर्त्तुनजय कहलाता है।
जो टूटता 100 बार फिर भी लड़े वह ही अजय कहलाता है।।
नहीं हारता जो अग्नि से तेजोमय कहलाता है।
जो रचता इतिहास अमर अपनी रुधिर सिहाई से,
जो करता है प्रीत सदा, त्रलोक्य रघु राई से।
जो मानव हित संघर्ष करे , बस वही विजय कहलाता है।
©shivatomar
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