N

काला, हो तुम

काला
सब सोख लिया
अपने तन
फिर भी ना बदला,
वो है काला
रंगो के रंग बौछरो के
सीने में ले अंगरो से
सब निगल गया वह नीर समझ
पर उफ न किया उसने
तनिक भी
तब वह काला बन आया है
सिखा गया सब को जग मे
की डर न, तू किसी डर
खुद को ना बदलने देना तू
अस्तित्व बनाये रखना तू अपना
सीने मे सोख लेना तू ,
सरे अत्याचारो
फिर भी ना बदलना
तू बन काला
काला ,काला
©nihalnat