आपका जन्मदिन पूरा संसार मनाता है आपकी पूजा करता है सच्चे दिल से आपकी अर्चना करता है उपवास रखता है
फिर भी आपको प्राप्त नहीं कर पाता। आपने जन्म लिया धरती में धर्म की स्थापना के लिए वो आपका धर्म कहां गया आपके जाने के बाद ?
आपके आदर्श कहां चले गए सब?
एकता की भावना , प्रेम, परमार्थ, कहां खो गया सब?
आपने बहुत कुछ त्याग किया , बहुत सारी समस्याएं अाई
आपने हंसते हुए सबको समाप्त किया आपने अंधकार से उजाले में जाने का मार्ग दिखाया वो सब आज कहां गुम हो गया? निःस्वार्थ भाव से दूसरों के लिए जीना सिखाया ,सभी लोगों से प्रेम करना सिखाया चाहे वो पक्षी हो, इंसान हो ,या फिर मूक प्राणी हो , फिर आज वो प्रेम कहां है? आपने राजा_ रंक , ऊंची नीची जाति में कोई भेद नहीं रखा आपने केवल धर्म का साथ दिया फिर आज ये भेदभाव क्यों?
आपने अपनी बहन को उसके प्रेम के साथ भाग जाने के लिए आज्ञा दी उसको मन पसन्द वर चुनने का अधिकार दिया आज वो अधिकार कहां है?
आपने अपने पार्थ को हमेशा उच्च ज्ञान की सीख दी आज वो दोस्त कहां चले गए?
आपने अपनी सच्ची मित्रता दिखाई सुदामा जी जो बचपन के दोस्त थे कभी नहीं भूले आप उनको आज वो मित्रता कहां चली गई?
आपने सत्य असत्य के दिव्यदर्शन कराए आज वो कहां है ? आज इंसान उन सब चीजों से परे क्यों है?
आपने स्वतंत्र रहना सिखाया , अपने अधिकार के लिए अपनी बात रखना सिखाया आज वो सब कहां है?
हर चीज गायब सी हो गई आपके चरण धरती से उठते ही सब लुप्त सा हो गया । ये कौन सी माया आपने छोड़ी है यहां जो हम सबको बांधकर रखी हुई है अपने ही जाल में?
हर साल आपका जन्मदिन आता है पर हम आपके आदर्श आपके धर्म आपके ज्ञान आपके बताए हुए रास्ते से क्यूं दूर है?
©anusingh
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