हर एक शुरुआत पर
घबराहट सी होती है
मेरी हर साँस पर
आहट तेरी होती है
कहनें को तुम
दूर रहते हो हमसे
मगर रुह में बस चुके
हो तुम कब से
प्राण जब निकलतें मेरे
काश तुम मेरे करीब होतें
रुह में तो बसा लिया
काश तुम नसीब में भी होतें।
©sayranazin
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