काश ऐसा हो जाता,
मैं पलके झुकाता,
और सब बदल जाता!!
ये दिन - रात, ये दुख - सुख,
सब कही लुप्त हो जाता!!
ये आस - प्यास, ये त्रास - व्यास,
सब समाप्त हो जाता!!
मेरा दर्द, मेरा प्यार, मेरा हर एहसास,
कही दफन हो जाता!!
काश ऐसा हो जाता,
मैं पलके झुकाता,
और सब बदल जाता!!
ये तिश्नगी, ये त्रासदी,
ये खालीपन, ये सूनापन,
सब मिट जाता!!
ये दीवानापन, ये अवारापन,
ये ना गुजरने वाले लम्हे,
सब कही गुम हो जाता!!
काश ऐसा हो जाता,
मैं पलके झुकाता,
और सब बदल जाता!!
©anvisha
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