*मैं गणित का विद्यार्थी हूँ,,पर प्रेम का प्रमेय ,, मैं कभी सिद्ध नहीं कर पाया, जैसे गणित में मानना पड़ता है बस वैसे ही तुम्हें जीवन भर के लिये अपना मानकर शायरियाँ लिखता रहा..मुझे पता तुम्हारे जीवन में मेरा स्थान उतना ही है ,जितना दशमलव के बाद वाले शून्य का होता ह,,।।।*
*वियोगी*
©rohit123
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