कैसे अदा करूँ आज अपनी मोहब्बत कि
उसके गम कम हो जाएं
अल्फ़ाज़ भी नहीं मेरे पास तो
जो उसकी रूह में उतर जाएं।।।
ग़मों को यूं समेट खुद में,
वो कुछ ऐसे ही खो जाएगा
नींद भी कहाँ आयी होगी उसे
बस करवटों में रात गुज़ार जाएगा।।।
कह देना कोई आफताब से,
उनके हौंसलों को कैसे दबाएगा
चाँद होगा मोहताज़ तेरी रोशनी का
जलते चिराग को तू क्या बुझायेगा।।।
कमी तो पूरी न होगी उसकी
जो छोड़ कर गया है
उसकी यादें भी तुझे बस खुशियाँ ही दें
यही इस 'नाचीज' की दुआ है।।।
©deeprichu
D