कैसे करें उसे बेकरार अब ।
कैसे करें उसे बेकरार अब
नहीं मेरा उसपे इख्तियार अब
शब-ए-फिराक पहाड़ सी हैं
सो जा तू ये दिल-ए-बेजार अब
सुबह होगी तो फिर सोचेंगे
कितना करना है उसका इंतज़ार अब
इन आंखों के आंसू जो पोंछ दें
यहां दिल नहीं ऐसा कोई मेयार अब
अनुराग क्या रोये फ़रेब-ए-आसमां को
हमें खुद पे नहीं ऐतबार अब।