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कैसे उगाए प्यार का शजर वहां जिसका दिल बंजर है।

कैसे उगाए प्यार का शजर वहां जिसका दिल बंजर है
समझ में नहीं आती उसे कोई बात कैसा मंज़र है।
मेरे जैसा नहीं है तिश्नगी उसके दिल में मुहब्बत की
हंसी लबों पर है मगर आस्तिन में मेरे लिए रखी खंजर है।
आ कर किस मोड़ पर आज़ खड़ा हो गया हूं मैं
पिछे गर खाई है तो आगे ग़म का समंदर है।
ऐ दोस्त यहां तो सभी बन के घुम रहे है नक़ाबपोश
कोई किसी का हमदर्द बना तो कोई यहां रहबर है।
मगर क्या करें कोई तो है जो धड़कता है जिंदगी बन कर
कोई तो है जो रहता हमेशा दिल के अंदर है।
समझ के आग लगाना अनुराग के घर में तुम
मेरे घर के क़रीब ही तुम्हारा भी घर है।
©anuragrahi