मरे हिंदू या मुस्लिम,
किसी मां के बेटे मर जाते है,
बलि चढ़ते है वह मजहब की,
किसी नेता का वो काम कर जाते हैं।
कैसी राजनीति है ये
भाई भाई के ना हो पाते है
राज्य सत्ता के चक्कर में
इन्शान इतने गिर जाते है
सोचता नहीं है कोई देश की
ओर इसे दीमक की तरह खा जाते है
अगर करे कोई ईमानदारी
तो अपनी उंगली पर नचाते है
फिर वह ईमानदारो की
बलि वो चढाते है
नहीं सोचते है देश की वो
अपनी जेबो को भर जाते है
हमे लड़ा कर आपस मे वो
वापिस वोटो को ले जाते है
कैसा लोकतंत्र है ये
जहाँ मंत्री जेब भरने आते है
ओर अपने कर्तव्यों से वो
गद्दारी कर जाते है
सच में गलती अकेले मंत्री की नहीं
हमारी भी होती है
जो अपना वोट बेच कर
जनता हाय हाय फिर रोती है
हम हमारे वोटो का मूल्य
नहीं समझ पाते है
तभी मंत्री लोग इसका
बहुत फायदा उठाते है
अब हमे भी वोट का मूल्य समझना है
और वोट को 100% जाकर देना है
नहीं झुकना है किसी के आगे
ओर ना झुकना है
एक जन्म मिला है उसमे
भारत देश का नाम करना है
द्वारा शुभ शर्मा
प्रेरक वक्ता
जय हिंद जय भारत
©shubh
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