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कब आओगे... कब आओगे ।

कब आओगे... कब आओगे
मेरा दिल ये पुकारे... तेरा नाम
मैं हो गई तेरे प्यार में पागल
जालिम जमाना करे मुझे बदनाम ।
मन ऐ कहें मेरा रूत मिलन की है आई
दिल के उपवन से मैने है फुल सजाई
राह निहारूं तेरा अब मैं सुबह-ओ-शाम
मेरा दिल ये पुकारे... तेरा नाम
कब आओगे... कब आओगे ।
कोई नहीं है दुजा मेरा इस जहां में
घुटने लगा है दम अब इस मकां में
तुही भगवान मेरा तुही चारो धाम
मेरा दिल ये पुकारे... तेरा नाम
कब आओगे... कब आओगे ।
पतझड़ गुजरा महकती बसंत है आयी
तन्हाई में तेरा इक खत भी न आयी
बैठीं हूं भरोसे तेरे अपने दिल को थाम
मेरा दिल ये पुकारे... तेरा नाम
कब आओगे... कब आओगे
जालिम जमाना करे मुझे बदनाम
मैं हो गई तेरे प्यार में पागल
मेरा दिल ये पुकारे... तेरा नाम
कब आओगे... कब आओगे ।
©anuragrahi